मेरी प्रेरणा

आज फिर तुमने कह दी,
बिना सोचे, बिना समझे ।
मुझे थोड़ा जाने, अनजाने ।
भींग गयी मेरी पुतलियाँ,
पर न थे कोई आँसु ।
भींग गया मेरा दिल ।
कुछ पंक्तियाँ, अपनापन लिए।
बिना पहचाने कि मैं कौन,
या खुब पहचाने मुझे ।

वर्षों पहले सुनता था,
ऐसी ही कुछ पंक्तियाँ,
मेरी नगण्य शक्ति पर।
बस आज तक वही ,
सच होती गयी ।
पता नहीं क्यों,
उसके बिना रहता ,
मै एक अकिंचन ।

मैं ढुंढ रहा था,
काफी दिनों सें,
कुछ ऐसे ही शब्द ।
आज फिर तुमने कह दी,
दुहरा दी वही बातें ।
थोड़ा हँसकर,
मेरी नादानी पर,
मोती से तेरे दाँत ।
थोड़ा गर्वित,
मेरे कारनामों पर,
होंठ कह गये कुछ पंक्तियाँ,
बस समझाकर ।

मैं उतावला नही दिखता,
पर सच पुछो तो – हूँ ।
पर लगता है फिर आज,
चुपके धड़कता है दिल मेरा ।
सच होंगी तेरी पंक्तियाँ,
सच होंगे मेरे सपने,
तु है फिर मेरी प्रेरणा ।

5 thoughts on “मेरी प्रेरणा”

  1. मैं उतावला नही दिखता,
    पर सच पुछो तो – हूँ ।
    पर लगता है फिर आज,
    चुपके धड़कता है दिल मेरा ।
    सच होंगी तेरी पंक्तियाँ,
    सच होंगे मेरे सपने,
    तु है फिर मेरी प्रेरणा ।

    hummmmmm

    who is this Prerana

    kavita acchi hai 🙂

    Reply
  2. आज फिर तुमने कह दी,
    बिना सोचे, बिना समझे ।
    मुझे थोड़ा जाने, अनजाने ।
    भींग गयी मेरी पुतलियाँ,
    पर न थे कोई आँसु ।
    भींग गया मेरा दिल ।
    कुछ पंक्तियाँ, अपनापन लिए।
    बिना पहचाने कि मैं कौन,
    या खुब पहचाने मुझे ।

    वर्षों पहले सुनता था,
    ऐसी ही कुछ पंक्तियाँ,
    मेरी नगण्य शक्ति पर।
    बस आज तक वही ,
    सच होती गयी ।
    पता नहीं क्यों,
    उसके बिना रहता ,
    मै एक अकिंचन ।

    मैं ढुंढ रहा था,
    काफी दिनों सें,
    कुछ ऐसे ही शब्द ।
    आज फिर तुमने कह दी,
    दुहरा दी वही बातें ।
    थोड़ा हँसकर,
    मेरी नादानी पर,
    मोती से तेरे दाँत ।
    थोड़ा गर्वित,
    मेरे कारनामों पर,
    होंठ कह गये कुछ पंक्तियाँ,
    बस समझाकर ।

    मैं उतावला नही दिखता,
    पर सच पुछो तो – हूँ ।
    पर लगता है फिर आज,
    चुपके धड़कता है दिल मेरा ।
    सच होंगी तेरी पंक्तियाँ,
    सच होंगे मेरे सपने,
    तु है फिर मेरी प्रेरणा ।

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